अभी तक दिनेश परीक्षा स्थान तक पहुँच गया था, सभी परीक्षार्थियों को प्रश्न पत्र व् उतर पुस्तिका दी जा चुकी थी, एक पांचवी कक्षा वाले बालक के लिए किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में बैठने का यह पहला अनुभव था, इस कारण से दिनेश अभी तक परीक्षा सम्बंधित नियम से भी ज्ञात नहीं थे खासकर परीक्षा में दिए गए समय के लिए।
नवोदय की परीक्षा में कुल 100 प्रश्न बहुवैकल्पिक होते है और समय 2 घंटे 30 मिनट दिए जाते है। 100 प्रश्नो में से 60 प्रश्न तार्किक विचार (Logical Reasoning) , 20 हिंदी/ इंग्लिश (परीक्षा का माध्यम ) तथा 20 प्रश्न सरल गणित से दिए जाते है।
दिनेश ने लगभग 10 - 15 दिन तक तैयारी की थी तो उसे परीक्षा के बारे में कुछ समझ थी और रीजनिंग में अच्छे से सभी तरह के प्रश्न सीखे हुए थे। जैसे ही परीक्षा शुरू करने के लिए घंटी बजी सभी बच्चे अपनी - अपनी पुस्तिका में खो गए इसी क्रम में दिनेश को पता ही नए चला की कब उसे उतर लिखते हुए 45 मिनट हो चुके है और उसके कब पहले 60 रीजनिंग के प्रश्नों के उतर लिख चूका है ,दिनेश के पास उस समय घड़ी नहीं थी तो उसने टाइम पास में बैठे एक साथी से पूछा तो उसे उतर मिला कि एक घंटा होने को 10 मिनट है , दिनेश के दिमाग में आया के अब परीक्षा समाप्ति में 10 मिनट का ही समय है नहले पे दहला उसे अगले भाग गणित का था , इस भाग को तो दिनेश ने बस जल्दी में बिना गणना के पुस्तिका में उतर निशान लगा दिए थे वैसे भी दिनेश का हाथ गणित में तंग था उसे तो उस समय तक ये भी पता नहीं था की लघुतम समावर्त्य (L.C.M) भी गणित का कोई अवधारणा (Concept) है। जैसे ही 1 घंटे वाली घंटी बजी तो दिनेश की समझ में आ गया कि अभी तो काफी समय है और उसके पसंदीदा विषय हिंदी के 20 प्रश्न आने वाले थे , दिनेश ने हिंदी के प्रश्नो के उतर बहुत आत्मविश्वास के साथ किये और अब ख़ुशी- ख़ुशी घर अपने माता- पिता के पास लौटने को बस स्टैंड की तरफ चल पड़ा।
नवोदय की परीक्षा में कुल 100 प्रश्न बहुवैकल्पिक होते है और समय 2 घंटे 30 मिनट दिए जाते है। 100 प्रश्नो में से 60 प्रश्न तार्किक विचार (Logical Reasoning) , 20 हिंदी/ इंग्लिश (परीक्षा का माध्यम ) तथा 20 प्रश्न सरल गणित से दिए जाते है।
दिनेश ने लगभग 10 - 15 दिन तक तैयारी की थी तो उसे परीक्षा के बारे में कुछ समझ थी और रीजनिंग में अच्छे से सभी तरह के प्रश्न सीखे हुए थे। जैसे ही परीक्षा शुरू करने के लिए घंटी बजी सभी बच्चे अपनी - अपनी पुस्तिका में खो गए इसी क्रम में दिनेश को पता ही नए चला की कब उसे उतर लिखते हुए 45 मिनट हो चुके है और उसके कब पहले 60 रीजनिंग के प्रश्नों के उतर लिख चूका है ,दिनेश के पास उस समय घड़ी नहीं थी तो उसने टाइम पास में बैठे एक साथी से पूछा तो उसे उतर मिला कि एक घंटा होने को 10 मिनट है , दिनेश के दिमाग में आया के अब परीक्षा समाप्ति में 10 मिनट का ही समय है नहले पे दहला उसे अगले भाग गणित का था , इस भाग को तो दिनेश ने बस जल्दी में बिना गणना के पुस्तिका में उतर निशान लगा दिए थे वैसे भी दिनेश का हाथ गणित में तंग था उसे तो उस समय तक ये भी पता नहीं था की लघुतम समावर्त्य (L.C.M) भी गणित का कोई अवधारणा (Concept) है। जैसे ही 1 घंटे वाली घंटी बजी तो दिनेश की समझ में आ गया कि अभी तो काफी समय है और उसके पसंदीदा विषय हिंदी के 20 प्रश्न आने वाले थे , दिनेश ने हिंदी के प्रश्नो के उतर बहुत आत्मविश्वास के साथ किये और अब ख़ुशी- ख़ुशी घर अपने माता- पिता के पास लौटने को बस स्टैंड की तरफ चल पड़ा।

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