गुरुर्ब्रह्मः गुरुर्विष्णुः गुरूर्देवो महेश्वरा।
गुरुः साक्षात् परं ब्रह्मः तस्मैः श्री गुरूवे नमः।
अभी पिछले ब्लॉग में आपने पढ़ा कि अब दिनेश पांचवीं कक्षा में पहुंच गया है , अब आने वाले समय से वह अनभिज्ञ था ,वह तो खेलने कूदने और पढ़ाई में लगा हुआ था तभी एक दिन अध्यापक जी कुछ फॉर्म लेकर आये जो सिर्फ दो ही थे तो गुरूजी एक फॉर्म अपने बेटे के लिए व दूसरा स्कूल के होशियार बच्चे के लिए लाये थे, होशियार से तो समझ ही गए होंगे कि वो फॉर्म दिनेश की जिंदगी की दशा व दिशा बदलने के लिए ही था।
दिनेश के गुरूजी महज़ 200 -300 रूपए के लिए बच्चों की जिंदगी अन्धकार से ज्ञान के उजाले की तरफ ले जाने आए थे। गुरूजी की पढ़ाई बी. ए तक ही थी जिससे बाद में सरकार की पात्रता शर्तों के आधार पर पढ़ाने के लिए अयोग्य घोषित किया गया पर उस समय तक गुरूजी बहुत से बच्चों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा दे चुके थे , इस बात का प्रमाण इस से ही मिल जाता है कि अब उन बच्चों में से 50 प्रतिशत तक हिमाचल सरकार की नौकरियों में पहुँच गए हैं और बाकि के भी कुछ न कुछ जिंदगी में अच्छा कर रहे हैं।
अध्यापक नवोदय विद्यालय में प्रवेश परीक्षा के आवेदन पत्र लाए थे , नवोदय विद्यालय के बारे में गांव में कुछ पता ही नहीं था। फिर भी गुरूजी ने दिनेश के माता-पिता से बात करके उन्हे इस परीक्षा के लिए आवेदन करने को मना लिया था।
अब समय रेत के सामान निकल गया और अब पांचवी का परिणाम आ गया जोकि उम्मीद के मुताबिक ही था दिनेश 300 में से 225 अंक लेकर प्रथम आया था , परिणाम के साथ साथ गुरूजी ने एक और बात बताई कि अगले महीने नवोदय की प्रवेश परीक्षा शहर के माध्यमिक विद्यालय में आयोजित की जाएगी और अब उसके लिए पढ़ाई शुरू करनी चाहिए। अगले ही दिन पिता जी नवोदय प्रवेश परीक्षा की तैयारी करने पुस्तक ले आये और अब दिनेश पूरे मन से पुस्तक पढ़ने में लग गया अब परीक्षा का दिन भी आखिर आ गया।
परीक्षा से पहले दिनेश बिलकुल अनजान सा शहर के स्कूल में परीक्षा के बारे में निर्देश सुन रहा था। पर वह ये सोच कर ही खुश था की आज शहर में घूमेंगे और आज शायद पहली बार शहर की हवा में कुछ सपने देखना शुरू कर चूका था। इस से आगे अब दिनेश परीक्षा में निर्धारित जगह बैठने चला जाता है और अब आगे अगले ब्लॉग में :-

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